
२०५५ साल माघ २६, २७, २८, २९ गतेके दिन सिरहा जिल्ला लहान न.पा. वडा नं. १ सिंगराही पडरिया निवासी श्री खड्ग नारायण चौधरी के फार्ममे विलु गंगाराम नामसे समाजमे परिचित श्रध्येय श्री बरियार माईझ वंशजके प्रथम दियादी सम्मेलन भव्य रुपसे सम्पन्न भेलै । सिरहा, सप्तरी, उदयपुर सुनसरी तथा मोरङ्ग जिल्लाके विभिन्न गामसे याल दियाद प्रतिनिधी सबके यी सम्मेलन अपन खन्दानके भविष्यमे चीर कालतक जीवित राखैके लेल विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णय केलकै । जेनाकी :-
१. बरियार माईझ परिवारके सम्पूर्ण सदस्य सबके चीर कालतक संगठित राखैले चीनारी हेतु एकटा प्रतिक शब्दके जरुरी भेल के कारण आपन थर कायम करैके सन्दर्भ मे चौधरीके जगहमे मूलपितामह श्रध्येय श्री बरियार माइभके नाम स्थापित करैले भावी सन्ततीके नाम के अन्तमे बरियार शब्द विभूषित क्याल जेतै ।
२. हमर वंशमे बिलु गंगाराम चीनहारीके एकटा लब्ध प्रतिष्ठित व्यक्तित्व भेलाके कारण ओकर नामसे एकटा संस्था स्थापना क्याल जेतै ।
३. बरियार माईझ वंशके भावी सन्तान सबके सहायता स्वरुप एकटा कोष खरा क्याल जेतै ।
४. यै परिवारके विभिन्न सदस्यके सम्बन्ध स्थापित करैके लेल वंशावलीके लिखित संग्रह करके पुस्तकाकारमे प्रकाशित क्याल जेतै ।
५. प्रत्येक साल माघ के अन्तमें दियाद सबके एकटा साधारण भेला क्याल जेतै ।
विभिन्न गामसे झरल दियाद सबके उपसथित सम्मेलनमे सर्वसम्मत रुपसे उपरोक्त प्रस्ताव पास केलकै । धन्यवाद।

धर्म संस्कृति और परम्परा कोनोभी जाईतके खन्दान आ वंशके पहिचान चिये। धर्म संस्कृक्तिके लोप हैंते कोनोभी खन्दान आ बंशके पहिचानमे प्रश्न उइठ सकैछै। तही दुआरे अपन धर्म संक्ति और परम्पराके संरक्षण आ सम्बर्द्धनके बात करैत हमरा बहुत गर्व महसुस भ्यारहल आईछ ।

जातिय धर्म और संस्कृतिके सन्दर्भमें हमसव थारु चियै। यि थारु शब्द थारु जाईतके इतिहास सो हो बतारहल याईछ। तै दुआरे थारु कहैत हमरा गर्व महसूस भ्यारहल याईछ। चारु शब्द "था+रु" यी दुईटा अलग अलग शब्द मिलके बनल है। जकर अलग अलग अर्थ है "था = छेले , रु = प्रकाशमान" हैछै। यी दुनु शब्दके अर्थ एक जगहमे मिलेलासे हैछै थारु जाईत आदीकालमे प्रकाशमान रहै, तेही दुआरे थारु कहैत हमसव के खुशी लागैये। थारु बंशावलीके हिसाबसे "बिलु गंगाराम" अर्थात "वरियार" खन्दानके बृज पितामह पूज्यवर श्रद्धेय स्वर्गीय श्री बरियार माईझके जेठका लरका आदि लौहपुरुष महामानव माने माइक 'गणराज्य" व्यवस्थाके मानराजा रहै से बात ११ माँ पुस्ताके जिल्ला सप्तरी ग्राम मधुपट्टी निवासी श्रद्धेय स्वगर्गीय श्री पन्चुदास दूरा बोलत रहे। जे बरियार बंशके सम्पूर्ण इतिहास अपने खुह से बतेने रहे। परापूर्व कालमे शिक्षाके अभावके कारण हमर पूर्खा सब अपन बंशके इतिहासके वारेमे बैज्ञानिक खोज तलास आ उचित विचारके विकास नई क्यासकलकै । ताब ई सम्बन्धमे कोनोभी लिखित प्रमाण नै प्रकासित क्या सकलर्क। एकर परिणाम आई हमरा सबके अपन बंशके बारेमे बहुत कम जानकारी है।
बास्तबमे खोजतलास करलापर पूर्व मेची से पश्चिम महाकाली लगायत चम्पारण गोरखपुर, कुमाउ, गडवाल सहित तराईके सम्पूर्ण भू-भागमे बारु सबके गणराज्य व्यवस्था रहै। यि बातके समर्थनमे बुद्धदास भिक्खु नामके बौद्धिष्ट कहने रहे कि प्रागैतिहासिक कालमे हिमालके निचला फाँटके जबमुद्धीप कहै छेले -बोई जगहके छोटका बरका अधिराज्य सवमे राजा सव आ गणराज्यसवमे गणपति सव शासन करैछेलै । तेहनेग अनुसंधान कर्ता राई डेभिड कहने रहे कि कपिलवस्तु दिसनके जंगल आ जमिनमे अधारीत शास्य गणराज्य चलल खेले। शाक्य किसानके राज्य छेलै आ अगुवाके चुइनके राजा बनावै छेलै । शुद्धोदन येहनग किसिमके राजा छेलै । आ भावदत नामके विद्धान कहने छै कि पहिने थारु गाणराज्य रहे मुकुनदसेन प्रथम थारु सबके प्रमुखके नोकरी करने रहतै। थारु बिज्ञ महान्यायधिवक्ता रामानन्द प्रसाद सिह सोहो करने रहे"मेचिसे लके महाकालीतक सख्वाके जगल भितरमे खेती कैरके रहेवाला थारु सव बरका जमिनदार सब रहै। गणराज्य शासन व्यवस्थाके आधारमे राजा चुनै छेलै । औरो प्रमाणके आधारमे माने माईक बरका जमिनदार रहे। गाणराज्य व्यवस्थाके आधारमे चुनलाहा तिरहुत राज्यके गदी चौरासीबाला राजा रहे । माने माइक अपन बिद्धता, सहासी, उच्च बिचार, लोकल्याणकारी, सत्यबादी, पैयवान, समाज सेवा, काम कर्तव्य चातुर्य, कलाकृति आ दैविक शक्ति और अलौकीक ज्ञानके प्रभाबसे मानराजा भेल रहे। ५००-६०० बर्ष पहिनेके सत्य तथ्य प्रमाण सवसे प्रमाणित हैछे। माने माईझके बृज पितामह वरिवार माईक पश्चिम न
थप बिवरण.....
आइके युग बिज्ञान प्रविधि और इन्टरनेट सेवाके युग चियौ | यी युगमे मनोविज्ञान तरिकासे हमरसवके काम करैत अगाडी बैढके आवश्यक है | यदि हमर सवके अगाडी नै बढवैत विकासके पुर्वाधार सब बन्द भ्याजयैत और अपन संस्कृतिपहिचानसँगे वंशके सन्दर्भमे मूल पितामह पुज्यवर श्रधेय श्री वरियार माइझके प्रतिभाशाली पुत्र माने माइझ मानराजा पाते माइझ पताईर पोखै र निर्माता के पहीचान सोहो धीरे-धीरे समाप्त भ्याजेतै | तै दुवारे अपन संस्कृति या गौरवशाली धरोहर सबके संरक्षन सम्वर्द्न कैरके आवश्यक छै | हरेक साधारण सभाके बेटी , पुतौह , महताइर और घरवालीसबके नाम , गाम , याकवंस ” वंशावाली “ पुस्तिकामे समावेस करावैके विचार यावै छैले | यै मुताविक पडरिया लहान -११ निवासी स्व: दुर्गानन्द चौधरी ( शिक्षक ) नामवली संकल्न करले लागलै | बहौत दियाद बन्धुसब समयमे ध्यान नै देलासे यी काम अधुरा रैहगेलै | यी अधुरा काम पुरा कारावैले हमरा शिवनगर निवासी श्री सत्यनारायण चौधरी और जटियाही निवासी श्री हरिनारायण चौधरीके सक्रिय करयाके नाम छुटलाहा दियाद सबके घर-घरमे ज्याके नामवली संकन करैले पडलै | हम वहौत दु:ख भोग्लियै |
समय सापेक्ष अनुसार “ विलुगंगाराम सेवा समिति “ के मूल समिति और वरियार परिवार कर्मचारी समितिके सल्लाह सुझाव मुताविक छपाइके काम सम्पन्न भेलै | यदि यी कामके समयमे लिखल नै जेतियैत आवैबाला पिढीके बहौत दु:खके सामना करैले पडतियै | छपाइमे कोनो किसिमके प्राविधिक त्रुटी या भुल भेलामे क्षमा मागै चियै साथै स्वच्छ आलोचना करैत आवश्यक सुझाव दैकेलेल सोहो अपेक्षा राखै चियै |

समय सापेक्ष अनुसार “ मूल समिति “ और “ वरियार परिवार कर्मचारी समिति “ के सल्लाह सुझाव मुताविक छपाइके काम सम्पन्न भेलै | यदि यी नामावली समयमे संकलन और लिखल नै जेतियैत आबैबाला सन्तान – पिढीके बहौत दु:खके सामना करैले पडतियै | छपाईके क्रममे ह्मरसे कोनो किसिमके प्रविधिक त्रुटी या भुल भेलामे छमा मागै चियै साथै स्वच्छ आलोचना करैत आवश्यक सुझाव दैकेलेल सोहो अपेक्षा राखै चियै |
श्री सत्यनारायण चौधरी -१३
अध्यक्ष - वरियर परिवार कर्मचारी समिति
शिवनगर , सिरहा हाल :- लहान – १ सिंग्राही
सहयोगी सम्पादक
श्री रामानन्द चौधरी -१४
पडरिया ,लहान – ११ सिरहा
श्री हरिनारायण चौधरी – १४
जरियाही , लहान – १२ सिरहा

वरियार परिवार विलु गंगाराम वंशावली अन्तर्गत १३ तेरहवाँ नम्बरके हम हरिहर चौधरी अपन ज्ञान विवेक अनुसार दुई शब्द अई वंशावली के लेखात्मक जानकारी करावैके लेल सदइच्छा जाहेर करें चि।मनमे प्रश्न उब्जैये की वरियार के ? ओई के बाद विलु गंगाराम थाकवंश में नामावली कोनाके ऐल ? यी तीनटा नाम से जो कोई भी अलमल पेरसकैऐ तेइके लेल जानकारी करावेई ची ।
सर्व प्रथम थाकवंश के नाम जब अधिराज्य भइरके थारू सामाज में जब ऐल त विलु गंगाराम नाम से ही और सब थारु वंशके व्यक्ति पहिचान में लेलक । लेकिन औरे वंशावली के इतिहास के बारेमे जानकारी होईत गेल त विरियार माइझ के नाम सबसे अग्रपंती में ऐल अखुन्त्लक जानकारी अनुसार एक नम्बर मे वरियार माईझ के उपरमे कोनो नाम नैई पता लागल सकलै । ओईसे उपर कोई ऋषी मुनी भी आई सक्कैये लेकिन ओहो नैई पता लागल आइछ तैइ हेतु वृज पितामह बरियार माइझ ही कहाबैके अधिकार देखलगेल । ओइ हिसाव से अखनका परिवारके सखा सन्तान सव अपना नामके वाद "वरियार" थारु लिखके सर्वसम्मत सहमति भ के, अपन - अपन नागरिकता लगायत जन्मदर्ता तथा अन्य सरकारी काम-काजमे अपन नामके "बरियार" थारु लिखके अपन-अपन नाम कायम भेल । अवचालु अगाडी वरियार माइझ के वाद ७ सात पुस्ता तक शिल शिर्लवा परिवारके वाली-फुलवारी - विकसित भेल लेकिन उनको सवके नामसे वंशावली कायम नइ भेल । जव अठवा पुस्तासे ऐल तव बिलु या गंगाराम दुइ भोइके नाम वंशावलीके जुडल अइछ वही नामसे थाक वंशाके नाम विलु गंगाराम राख्लगेल या अइ जगहसे थारु वंशके नाम पहिचानमे एल ।

शिवकान्त चौधरी - पुस्ता न.- १३
सचिव - बरियार परिबार कर्मचारी समिती
ठेगाना - ल.न.पा.-१७, एकरतिया
हाल- लहान - ६, सिरहा ।
बरियार (बिलु गङ्गाराम) थारु बंशावलीके इतिहासमे ई बंशावलीके यी संस्करण दोसर चियै । बंशावलीके यी आधुनिक स्वरुप तयार करैले बरियार (बिलु गङ्गाराम) के श्रद्धेय अग्रज स्व.पन्चुदास(दुरा-११) मधुपट्टीके मौखिक गोष्टिके आधारमे एवम बंशावलीके मुल समिती अध्यक्ष श्री खडग नारायण चौधरी, उपाध्यक्ष श्री सत्य नारायण चौधरी, सचिव श्री रामानन्द चौधरी तथा बरियार परिबार कर्मचारी समितिके संस्थापक अध्यक्ष स्व.श्री दुर्गानन्द चौधरी ,बर्तमान अध्यक्ष श्री सत्य नारायण चौधरी और कोषाध्यक्ष श्री हरिहर लाल चौधरी लगायत अन्य सम्पुर्ण सदस्य सबके उचित सर सल्लाह, आड भरोस तथा दोसर सन्सकरण पुस्तिका प्रकासन करैके लेल जे जेठनासे भी अपन तन, मन, धन और सकारात्मक सोच राइखके जे योगदान देलक से त बिसरैबाला नैछै ने त रहतै। यी बंशावलीके बारेमे थप उचित प्रयोग या खोज तलाश अनुसन्धान कार्य करैले भविष्यमे आबैबाला सन्ततिके लेल एकटा प्रेरणाके स्रोतके काम करतै तकर आशा राखैत यै से आबद्ध सम्पुर्ण महानुभाव जे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुपमे श्रद्धापुर्वक सहयोग केलक तकरा हम अपन तरफसे हार्दिक धन्यबाद दैले चाहै चियै । धन्यबाद ।
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