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ईतिहास, थारु आ लवाई माईझ बंशावली


     इतिहास वितल समयमै घटल घटनासवके वास्तविक तथ्य परक लिखित दस्तावेज चियै । जकर माध्ययमसे विगतके दिनसवमे वितल घटनासव जानै वुझैमै मदत मिलैछै । ईतिहास लिखैमै विभिन्न श्रोतसवमे से एक महत्वपूर्ण आ ठोस प्रमाण वंशावलीके भी मानल जाईछै । बंशावलीके अध्ययनसे नेपालमे ईतिहास लेखन कलामे सहयोग पुगल तथ्य सव छै । नेपालमे विभिन्न जाती वंश सवके कैयौ वंशावली भेटल गेल छै । तै मे थारुजाती या उपजाती समूहसवके वंशावली वहुत पुरान छै । लेकिन शिक्षाके अभाव इतिहास लेखन कलाके कमी, प्राकृतिक प्रकोप,आईगलगी,सांस्कृतिक आक्रमण जहाईत नमहर घटना सवके कारण यी ठोस प्रमाणसव लोप अवस्थामा रहलछै । साथे ईतिहास लेखन कलामे थारु जातिके पहँुच कम हेनाई अपन यतिहासके बारेमे दोसर चलाख,धुर्त वर्ग या पूर्वाग्रही ढंगसे कलम चलाईके कारणसे सोझा सिधा ईमान्दार थारु जातिके ईतिहास प्रारम्भिक कालसे तोडमरोर करल गेल वर्तमानमे बुझहैवला सव सचेत छै ।

     इतिहास लेखन कलामे सुत्रपात पश्चिममा लेखकसवसे भेलछै । नेपालमे ईतिहास लेखन कलाके शुरुवात अंग्रेजसवद्धारा भारतके इष्ट इण्डिया कम्पनी स्थापना काल पछाडी रहलछै । नेपालके इतिहासके पहिलका पुस्तक ब्लबअअयगलत या तजभ पष्लनमयmया ल्भउब िकर्कपैट्रिक,सन १८११ लन्डन चियै । जे नेपालके वंशावलीमध्ये एकटाके प्रयोग पुसतकमे करल गेलछै ।कर्कपैट्रिक नेपालके पहिलका वंशावलीसवमे प्रयोग करलहा व्यक्ति मानल जाईछै । फ्राीनसस बुचनल हैमिलटन के कृतिब्लबअअयगलत या तजभ पष्लनमयmया ल्भउब िलण्डनसे प्रकाशित (१८१९ ई) जे नेपाल इतिहास लेखनमे महत्वपूर्ण मानल जाईछै । नेपालके विभिन्न जातजातिके वारेमे इतिहास लेखन कला समय समयमे भेल गेल छै । भगवानलाल ईन्द्रजीद्धारा लिखित १८१४ ई. मे बंशावली लेखके रुपमे जर्नलमे प्रकाशित भेल छेलै प्रकाशित वंशावली बयान अनुसार शाक्यमूनि (वुद्ध) अशोक स्थुंकोके सम्वन्धमे चर्चा केल गेल छै । जे थारु वंशावलीके मानल गेल विद्धान सवके दावी छै । बेण्डाल,विलियम डिग्वेके इतिहास लेखनमे मुख्य योगदान रहै । १९०३ मे प्रकाशित बेण्डालके कृति १९०५ सिलवा लेवी व्यगचलब िया तजभ ब्कष्बतष्अ क्यअष्भतथ या द्यभलमब।ि विश्वस्नीय मानल जाइछै । हर प्रसाद शास्त्री १९०५ ई बौद्धतन्त्र पाण्डुलिपि,यी पूर्वीय लेखक सव बुद्ध वंशावली या पाण्डुलिपिके आधारमे इतिहास लेखन श्रोत के एक ठोस आधार मानै छेलै । नेपालके इतिहासके प्रथम पुस्तक अम्विका प्रसाद उपाध्ययद्धारा लिखित वि.सं. १९७९ प्रकाशित भेल रहै । तैहना समय अन्तरालसंगे विभिन्न शासनकाल समय परिस्थिति अनुसार इतिहासकारसवद्धारा राजनैतिक,सामाजिक,आर्थिक,सांस्कृतिक इतिहास लेखनकार्य भेल देखल जाईछै । तै मे डि.आर.रेग्मी, रामजी उपाध्याय,बालचन्द्र शर्मा के नाम चर्चित मानल जाईछैै । वि.सं. २०१८ मे इतिहास संशोधन मण्डल संस्था स्थापना एक करिके रुपमे रहलै बावुराम आचार्य योगी नरहरी नाथद्धारा ऐतिहासिक कृतिसव सम्पादन भेलछै । सन १९६२ मे तुच्चिके कृति अंग्रेजी माषामे प्रकाशित जै मे वंशावली श्रोतके प्रयोग रहै । डी आर. रेगमीद्धारा प्रकाशित कृतिमे – क्भअयलमबचथ क्यगचअभक) ठयासफू प्रयोग भेल छै । जगदीश चन्द्र रेग्मी आर.सी. रेग्मी आर्थिक इतिहासमे ठोस योगदान केने नै नकाईर सकैछै । विभिन्न दशकमे अनेक विद्धानद्धारा विभिन्न सन्दर्भ या विषयमे इतिहास लेखल गेल इतिहास वर्नित छै । त्रिरत्न मानन्धर,कृष्णकान्त अधिकारी,दिनेशराज पन्थ,तुल्सीराम बैद्य,राजेश गौतम लगायत इतिहासकारद्धारा नेपालके विविध क्षेत्रमे लिखल यथार्थ छै । वि.सं. २००७ साल पछाडी नेपालके अनेक विषय वस्तु केन्द्रित बहुत इतिहास लेखन कार्य भेलछै । नेपालमे प्रजातन्त्र प्रादुर्भावकालिन,संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्रात्मक ईतिहास समय अनुकुल रचल गेल प्रसंग सव यत्रतत्र पावैछै । तदनुसार नेपालके विभिन्न जातीय ईतिहासके बारेमे गैर थारुसव चलैने वास्तविकता छै । हदतक थारुके वास्तविक इतिहास उजागर कै।तो अधुरा अवास्तविक आ तोरमडोर के गन्ध बेसी पावल जाईछै । थारु इतिहासके वास्तविक इतिहास लेखन कार्य कुछ विद्धानसवद्धारा लेखल गेल इतिहास भरपर्दो या विश्वसनीय मान जेनाई ततसंगत छै । दर्जनौ इतिहासकार आ लेखकसवद्धारा लिखित कृतिसव प्रकाशन हेनाई खुशीके वात चियै । जै मे विद्धान रमानन्द प्रसाद सिंह,तेज नारायण पंजियार लगायत विद्धानके योगदान महत्वपूर्ण छै । हाल त थारु लेखकसवद्धारा प्रकाशित थारु सम्वन्धित कृति सत्यताके नजिक माईनके अध्ययन करनाई उचित ठहरनेसे मननीय हेतै ।

     थारु भाषामे प्रकाशित कुछ ऐतिहासिक दस्तावेज पत्र पत्रिका सवमे त्जभ चभब िकतयचथ या तजभ त्जबचग च्ए क्ष्लनज हमर ओ हमार वन्दा, राजा दंगी शरण,बरकी मार,बउआ आ बहुरिया,गुर्वावक जन्मौटी सखिया,गोचाली,हमार कहनाई,थारु संस्कृति,फुन्गी,होली,थारु संस्कार,रस,विहान,डलयैती,हमार पाहुना,थाविस अवाज,चिरखा,आईख,मुक्तिके डगर,जोगनी,त्रासन,दिया,सनेश,ओजरार डगर,बरखा,भईल भिन्सरवा,भुरुकवा,रेला,लवपूर्णिमा,थारुमुक्ति,फूलवार,कहली सुनली वुझली,थारु जाति और समय हमर गाम हमर वस्ती,पोह फाईट गेलै,कैहवी,कविता,चुटकिला,उपन्यास,कथा,थारु,शव्दकोष,पुस्तक,पत्रपत्रिका,इजोत,सतयके खोजी,चिनगारी,मागर,नाटक,व्याकरण,तैहना,शाक्यमूनि वुद्ध,फुटल करम,थार सनेश ईत्यादी प्रकाशनसे थारु ईतिहास लेखन प्रयासके अवस्था यैहेसे प्रमाणित हैछै ,जे थारुइतिहास लेखन कलामे कतेक प्रगति आ लेखन कार्य भ्यारहल छै । तथापि वर्तमानमे शिक्षा जगतमे थारुके पहँच वढावैके कारण थारुके वास्तविक इतिहास लेखनकार्यके अवस्थामे सुधारात्मक,व्यापकता,वास्तविकता आ निरन्तरता येतै जैमे सचेतता अपनेनाई समग्रमे कर्तव्यवोध करनाई बहुत मननीय बात छै । राज्य,सरकार आ सरोकारवाला यै कार्यमे प्रोत्साहन देनाई समगताके विकास हेनाई चियै । यद्यपि श्रोत साधन पूँजी,शिक्षा,चेतना के कमी यै प्रतिके जगेरना अभावके कारण प्रकाशनमे कमी महशुस भ्यालगेल जाईछै । जकरा संरक्षण सम्वद्र्धन आ प्रोत्साहन देनाई सबके साझा कर्तव्य चियै ।

     थारु जाति भितरके थर,उपथर सय से ज्यादा भेटल छै । कतेक अलिखित रुपमे रहल छै त कतेक लिखित रुपमे भेटल छै । खास कैरके नेपालमे पूर्व मध्य आ पश्चिमके थारु समूहमे निर्धारण केल गेल मानल जाईछै । सब ठामके थारु जाति पहिचानमे एक रुपता हैतो काम पेशा या पूर्खा सवके ख्याति अनुसार थर उत्पति भेले प्रष्ट हैछै । पूर्वमे कोचिलाके प्रभाव जै मे अनेक थर छै कलियाहा,महरखिया,थर समूह चौधरी,थारु मूल बोलावै वाला शब्द चियै । थार पंगहैत सबमे खाँ खमान,लवाई माईझ, नंगा वौहरी,सिंह,राई,माझी,धामी,पंजियार,ख्वास,बौछार,जसराज,हजदार,मझियान,लेखी,गजराज,मिर्दाहा,मंसापुरिया,सगतोरालगी,मौगियाहीआशा,खोनमा,चौधरान,धमियान,इसरान,गौरगोविन्दकमल,पचनिया,रघुवाही,भतुवाही,लोहवरिया,रौताभागी,विश्वास,पन्छान,गच्छदार,लम्पुछिया,अभिदुवाई,खोहरिया,सिकदार,जोईस,गोदनिया,गोजेवार,पोदार,तावेदार,सहनेयाविक्रम,त्रियाभातु,बसुवाही,तिरहुतिया,मझियान,मण्डर,तवदार,भण्डार,जोशी,महतो,गोरुवास,वंठा,ओरग्यान,कठैतनवी,फनैत,भगत,रौताभागी,काजी,कुमहार,सोनगढी,दनुवार,सगुनिया,बदली,ददकिचा मानपुर,बखरिया अगुवान,बहिरा दुमन,ठिकदार,बहिर भर्ती,दशौन,मछरा बदल,भिमरैता,तेजपल्ट,ढोंग,घनश्याम,जोईश,फत्तेपुरिया,गछिया मानपुर,उत्तमी,बोध माईझ शिवराम,कारु,तुलसाँ खाँ, माधव माईझ,काराई माईझ,मधु वनिया कलरु,बहिरा,रक्सु,रगमा खाँ, विलु मंगाराम,गाड,कमल,नैन,कुरहा पाँचु,कामुर धाईम,दलासिंह माईझ,मझियान, काश खाँ,विश्वनाथ खाँ लाढो विश्वा गोरखनाथ, बमभोल माईझ,जगतीराम किशुन फागु,जिवाई सिवाई राम किसुन,चिकन भखरु,दानी मानी कारी,अरियार वरियार,गिदहा कारो,कनहा पर्वत,कनहा मनियार,जानकी मानकी, केवल धामी,श्याम सुन्दर,हृदय सुन्दर,लगुवा,लहसन कला,दिना जगत,मईन,विरसिंह,बनिया,गछदार धेत पिन्हा,रगुवाही,बसुवाही,धवौलिया,खडेरिया,मुखरिया,रैटा,रैया,पनहोर,रजहटिया,गढवाल,मडराही,हथिहा भखरु कारी देवल,हेवकी,देवकी,रघुजदु,खुशियान,चानु,सोभित,जसमत खाँ,भष्मा रवी,ईत्यादि रहल छै । यी वाहेक और भी छुटल पंगहैतसव भ्यासकैछै ।पश्चिम दिसके थारुसब के कुछ थर ः

     दहित,जगन्ठिया,जिगुनी,घोटैली,धारकटुवा,डेमरनरौरा,छलडगिंया,सुखरिया,कटुकटुवा,मुदुवा,उल्टहवा, बखरिया उल्टहवा, चुकाहा, दुकरपुछिया, कठगरवा, गररिया, नसिंह, नम्वा, भगोरिया, कुसमिया, कार्या कुसमिया, ठाकुर कुसमिया, थम्पनहावा, राजपुत, कुसमिया, चिकना, कुसमिया, बौखही उल्टहवा, घन्टही उल्टहवा, टेर्रा, सोनपुरिया गुरुवा, राजवंशी, सत्गौवा, करिया भुम्किहावा, चधरैन, काँशी कुशमियाँ, ग्वावलावंशी, कुशमिया, लाल दरिया कुसमियाँ, राजवंशी, कुशमिया, बैदावा कुसमिया भेदया कुमिया,झर्रा कुसमियाँ, डेमनरौरा, बरका डेमनरौरा, बठवा, करिया बठवा, गुनगुनी अदुवा, कार्या अग्रहावा,घरच्वार,बैद्य सुवेदी,भंगी भित्तर,हरगुगवा,भूरिहवा,जोगेठवा,हरिदिउला,कुर्मी,थापा,कठरिया,नम्मोछिया,लामा,राजवंशी ठाकुर,कुचिला कुसमिया,पलपल कुसमिया,छोटकी डेमनरौरा,लोहटिकवा,चरना वठवा,नमकोलिया,घुघु घुरवा,हर्चववा,खरिया,भेडवा भाल्गुनी वैद्य,लोटी,चिल्रहवा,बाहर बग्यारया,करिया जिनगुनी,अहिर,गुनी,गमवा,कटकटवा,नोनबबुवा,ककुर पुजुवा,करिया मगरा,जुत्तही

     आदी थरमे लवाई माईझ नंगा बौहरी एकटा प्रमुख थर पंगहैत चियै । लवाई माईझ वंशावली यै बंशावली के सूर्योकंशोत्पति वृज पितामहः लवाई माईझ थारु चियै । गोत्र बंश पूर्खा लवाई माईझ थारु हालतकके अनुसन्धानमे सप्तरी,उदयपुर,सुनसरी,सिरहा,मोरंग,झापा,लगायत अन्य जिल्लामे बंशके सन्तानसव छै । वर्तमानतकमे यै वंशावलीके खोज अनुसन्धानवाद कुछ शाखा सन्तान छुटलास भौगोलिक आअ न्य कारणसे सम्वन्ध नै भेनाई खोज अनुसन्धान पूरा नै भ्याल छै । तै दुवारे यै के बारे खोज अनुसन्धान विस्तृत अध्ययन हेनाई नितान्त आवश्यक देखल जाईछै ।

     तराईमे धर्ती पुत्र लाखै वर्ष बसोवास कैर रहल आदीवासी चियै थारु संस्कृति ईतिहासके अध्ययनसे प्रष्ट हैछै । नेपालके मूलवासी थारुके मुख्य पेशा कृषि मानल जाइछै । नेपालके जनगणना २०५८ अनुसार कुल जनसंख्याके ३७.२ प्रतिशत आदीवासी जनजाती सुचिकृत ५९ समूह मध्ये संख्यात्मक हिसावले पहिल आ दोसर स्थान रहल थारु जातिके जनसंख्या १५३३८७९ उल्लेख छै । कूल जनसंख्याके ६.७५ प्रतिशत रहल तथ्यांकमे उल्लेख छै । लेकिन थारु कल्याणकारी सभा लगायत अन्य संघसंस्थाद्धारा ४० लाख थारु जनसंख्या हराहरीके दावी करल गेलछै । विद्धवानसवके दावी अनुसार भगवान गौतम वुद्ध थारुके सन्तान चियै से प्रमाणिक आधारसव जनावै छै । इसापूर्व २५०० सय वर्ष पहिलेसे बसोवास करल आईवरहलछै । कैयन दस्तावेज प्रमाण नष्ट भेला वजसे थारुके ईतिहास लेखनमे कठिनाई परल स्पष्ट हैछै, तथापि सारमे उदृत कुछ विद्धानसे लिखल ऐतिहासिक विवरणसव थारुके बारेमे सत्य तथ्य ईतिहास सिरोमनि बावुराम आचार्य ( २०१०) थारुहरु नेपालका आदीवासी हुन । गौरी शंकर दिवेदी (१९५७) थारुहरु शाक्य वंशीय क्षेत्रीय हुन । तारानाथ थारुहरु मंगोलका हुन । आर पी सी(१९८८) थारुहरु मंगोल मूलका आर्य पूर्वका हुन । सिलवा लेभी (१९९०), थारुहरुको जुन जातिमा समा्रट अशोक जन्मनु भयो । जनकलाल शर्मा,(२०४९) शाक्य वंशको उत्तराधिकारी आजको थारु समाज हो । पदमश्रेष्ठ(वि.सं.२०५७),थारु र शाक्य दुवै गौतम बुद्धका नसल हुन । कान्तिपुर दैनिक(२०६५ साउन २१) राप्रउ पोखरेल थारु मंगोलाईड समूहमा पर्ने जाति हो । (डिएन मजुमदार,आचार्य)

उपर्युक्त श्रोत सामग्रीके गहन,अध्ययन,विशलेषण करलाके वाद निचोरमे थारुसव आर्यपूर्वके मंगालियन समुदाय चियै ।

धन्यवाद!

लबाई माइझ थारु बंशावली

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