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दुई शब्द


नेपाल एकटा बहुजातीय, बहुधार्मिक और बहुसांस्कृक्तिक मुलुक छियै । नेपालमे जनजाति सबके संख्या बहुत है। जेनाकि पहाड़मे राई, लिम्बु, पाखा, सुनुवार, जिरेल, हायु, गुरुङ्ग, मगर, थकाली, धामी, चेपाङ्ग, तामाङ्ग और काठमाडौंमें नेवार जायत सोहो जनजातिये मे परैछे
नेपालके आदिवासी जनजातिमें से थारू सब एकटा प्रमुख आदिवासी जनजातिके रूपमे जानल जायौ । थारू भाषामे थारु सबके रहैवाला ठामके बरहौट कहै। बरहौट शब्दके मतलव उत्तर महाभारत पहाडसे दक्षिण भागके तराई-भू-भाग तकके जगह बुझाय है। थारू जायत सबके बसोबास नेपालमे २५ जिल्लामे पूर्वमेची नदिसे ल्याके पश्चिममे महाकाली नदिके किनारतक है। भारतके उत्तरप्रदेश विहार राज्य और बंगलादेशमे सोहो थारू जायतके बसोबास पत्ता लगाय रहल है। थारू जायतसबके बसोबास नेपालमे बहुत पहिनेसे तराईके भू-भाग और भित्री मधेश घनघोर जंगल मलेरिया हावा पानी बाला जगहमे आपन जीवन वितायत और जीवन निर्वाह करैत आवैष्छै । यी बात एभयउभि या ल्भउर्बा और क्थकतझ प्ष्ल ल्भउर्बा नामके किताबमे लिखल है । विद्वान डि.एन. मजुमदार कहने छै कि थारू जायतसब ७५% प्रतिशत मलेरिया पचाय सक्ने है। जबकि मलेरिया पचावैके लेल तीन हजार वर्ष से अधिक समय लागेछै । त यै वैज्ञानिकके कथनसे सावित भ्यारहल छै कि थारू जायत सबके नेपालमे बसोबास तीनो हजार
वर्षसे बहुत पुरान है।
विद्वानसबके कथन अनुसार ९ज्ष्कतयचथ ल्यचतजभचष्तथ गए। में वर्णन क्याल गेल है कि थारू जायतसब भारतके गंगा, जमुना नदीसे ल्याके उत्तर हिमालयके कांखतक आपन राज्य कैरहल छेलै । थारू जायत सब नेपालमें सभ्यताके अग्रदुत सेहो चियै । आयसे तीन हजार वर्ष पहिने लुम्बिनी अंचलके, कपिलवस्तु जिल्लामें राजा शुद्धोधन राज्य क्यारहल छैले । वरका-बरका विद्वान सब के कथन अनुसार शुद्धोधन थारू राजा छेलै । तैहने सेमव सेमवंशी राजा थारू छेलै । सम्राट अशोक सोहो थारू राजा छेलै । सिद्धार्थ गौतमबुद्ध थारू छेलै नेपालमे थारू जायतसब बुद्धके वंश चियै और बद्ध थारू वंशके चियै । अखैनतो कपिलवस्तु जिल्लाके लुम्बिनीके कात करौटमे थारू सबके बसोबास कायमे है। थारू जायत सब पुस्तौं पुस्ता एक ठाम, एक गाममे घुलमिलके बसोबास करैत आयवरहल है। मैं से सिद्ध भ्यारहल छै कि थारू जायत आपन जन्मभू‌मिके माया मोह तियाग नै करैले चारैछै । थारू जायत सब अपन देशके, अपन जन्मभूमिके जानों से बेसी माया करैछ । अपन देशके लेल बहुत दुःख कष्ट भोगैके लेल, सहैके लेल और मरैके लेल ८९७न तयार रहैछै । बारू जायत नेपालमे गरिव से गरिब भ्यागेलाके बादो अपन जन्मभूमि अपन गाम और अपन ठाम कहियो ने अपन मनसे छोरैले चाहैछै। उदाहरणके लेल नेपालके पश्चिमाञ्चल कंचनपुर जिल्लाके महेन्द्रनगरके सुक्लाफाँटके भित्तरमे पहिले यास जाइतसबके आँपके बगैंचा, विभिन्न फलफूलके बगैंचा घरदुद्वार सोहो छेलै लेकिन जब सरकारद्वारा शुक्ला फाँट राष्ट्र निकुञ्जके रूपमे घोषित भेलै त सैकडों राणा थारू सबके वय ठमासे हटाल गेल छै। अखन्तों शुक्ला फाँटके अलग बगलमे राणा थारू सबके बसोबास वर्तमान रूपमे क्याम छै यहासब देखसकै चियै ।


पूर्वकालमें यारू राजासब नेपालमे राज्य करै छेलै । श्री ५ बडामहाराजाधिराज श्री ५ पृथ्वीनारायण साह बाइसी औ चौवीसे राज्यसबके एकिकरण क्याके एकटा नेपाल विशाल एकैटा राज्यके स्थापनाके बाद थारू राजा सबके अन्त भेलै । पूर्वकालमे सम्राज अशोक थारू राजा छेलै । सेनवंशी राजासब थारू राजा सब छेलै । इतिहासकार सब प्रमाणित क्या सकलछै, अनुसन्धान कर्तासव पत्ता लगा चुकल है। पहिले थारू जायतमे बड़का बड़का राजा रजवाडा सब, बडका-बड़का धनी-मानी, सम्पत्तिवाला, अन्नके भण्डारवाला धनके मालिक सब छेलै । यारू जायतसबमे बड़का बड़का बौकार और पहलमान, बलिया, मोटा, हठ्ठाकठ्ठा, बड़का कान, राजेसी खोराक, शान्दार साठ-बाठ, बड़का-बड़का घर आँगन, दलान, धान राखैवाला बखारी, ठोक, टेक, मुनहर दुबारमें एक लायनसे पचियाल और विघ्छायल छेलै यी सब थारू जायतके पहचान सब छेलै ।
नेपालअधिराज्य पूर्व मेची से पश्चिम महाकाली अंचलमे कंचनपुर, कैलाली, बाँके, बर्दिया और सुर्खेतमें थारू जाति सबके शारीरिक बनावट चेहरा, नाक, कान, मुँह उचाई सब मिलल जुलल छै बोतवेहेक नै घरदुवार, आँगन, भन्साघर, गोसाईघर, विवाहमे बड़का ओसरा, कोली, खानपिन, बसाई, घर व्यवहार, भोजभत्तेर, भात और कलौं खाइला, लोटा हुक्का, हुक्काके नर, बुढ़बा सबके पहिरन धोती, उजरा टुक्रा साड़ी और बजारमे चुरा ढिकीके कुटला, चामल, खेत्तिपाती, बच्चासबके बीच खेलैके तोर-तरिका (घरवा दुवारबा खेल) खेतीपातीमे महिला पुरुषके समान लगनशीलता, भेष-भुषा, सामूहिक रूपमे बसोबास, घरके भित्ताके माईटके बुट्टा, कोहबर, इमान्दारिता, लगनशीलता, मेहनति, मिलनसारिता और सरल स्वभाव थारू जातिके उदाहरणके प्रतिक पहिचान चियै ।
कालान्तरमे अपनाके बड़का जायत कहावैवला और लोभी मरमाहट जातिसबके नेपालमे प्रवेशके कारण इमान्दार, सोझा सिधा, और सरल स्वभाव जाति जायत सबके अनेक, झेल-जाल, दाउपेच रचिइके थारू जातिसबके धनमाल, जग्गा जमीन और राजपाठ कौड़ी हतियावैत आयतकमे थारू जायतसबके सम्पत्ति चलान जायतसव टैंक लेलकै जकर परिणाम आय ९५% प्रतिशत थारू जायतसब भूमिहीन, सुखमवासी और
दरिद्रके चपेटामे पुगैलेल वाध्य भेलै । जगती, रामकिसन, फागुन तीन भैयारी सबके सन्तान हमसब आ-आपन पहिचान बनाबु, अपन मनमे शक्ति लाब मनके शक्ति अपनौरके भितरमे है, और शक्तिके जगाऊ, असम्भवयै दुनियामें कुच्छौं नै छै, कर्तव्यसे यै संसारके परिवर्तन हैछै, परिवर्तनसे परिणाम, मनमे उर्वशीलता लाबु, अवश्य एक न एकदिन सफलता मिल्वेटा करत ।
धन्यवाद ।

जगती रामकिसन फागु थारु बंशावली

राष्ट्रिय समिति, नेपाल

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